
*भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर दिया भक्ति-वैराग्य का संदेश*
*बृजेन्द्रसिंह लोधी चमरौआ* खनियांधाना के ग्राम चमरौआ में आयोजित सप्त दिवसीय संगीतमयी श्रीमद् भागवत कथा महापुराण के द्वितीय दिवस पर अनामिका देवी जी ने भागवत कथा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भक्ति के लिए ज्ञान और वैराग्य का संतुलन आवश्यक है। और उन्होंने कहा कि जब तक जीवन में ज्ञान और वैराग्य का समन्वय नहीं होता, तब तक भक्ति को पूर्ण नहीं माना जा सकता। सुखदेव-परीक्षित संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि जीवन की हर परिस्थिति में मनुष्य को भागवत भजन का आश्रय नहीं छोड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भागवत कथा में जो भी श्रद्धालु सीखने या पाने की भावना से आता है, उसे यह कथा अवश्य कुछ न कुछ प्रदान करती है।कथा में प्यासे बनकर, सीखने और आत्मकल्याण के उद्देश्य से आने वालों को भागवत कथा जीवन का सही मार्ग दिखाती है। और कहा कि मनुष्य जीवन विषय-वस्तुओं के भोग के लिए नहीं, बल्कि ईश्वर भक्ति के लिए मिला है, किंतु आज का मानव भक्ति से विमुख होकर सांसारिक भोगों में लिप्त हो गया है। जो भी श्रद्धालु भागवत कथा के तट पर आकर विराजमान होता है, उसका भागवत सदैव कल्याण करती है। कथा से मानव समाज में व्याप्त कुविचारों और विकारों का नाश होता है तथा भक्तिभाव जागृत होता है। कथा में चमरौआ सहित आस-पड़ोस के कई ग्रामों के श्रोता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।












